आलोचना ही असली तारीफ है, क्योंकि पत्थर की आलोचना नहीं होती। प्रशंसा झूठी हो सकती है, लेकिन आलोचना नहीं। प्रशंसा में कई भावों का संयोजन होता है, जबकि आलोचना अक्सर ईर्ष्या से प्रेरित होती है और ईर्ष्या हमेशा अपने से श्रेष्ठ व्यक्ति से ही की जाती है।”इन्हीं विचारों को व्यक्त करते हुए ध्रुव अग्रहरि ने अपने सभी आलोचकों को लौह प्रणाम करते हुए कहा कि वे उनकी आलोचनाओं को अपनी ताकत और प्रेरणा मानते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध और आलोचना ही व्यक्ति को और अधिक मजबूत बनाती है तथा आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है।बीते कल चौरंगी विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी श्री संतोष कुमार पाठक के साथ मुलाकात के दौरान विभिन्न सामाजिक एवं जनहित के मुद्दों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास, संगठन की मजबूती और जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।ध्रुव अग्रहरि ने कहा कि जनता का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है तथा वे निरंतर जनसेवा के लिए समर्पित रहेंगे।

