
नई दिल्ली / कोलकाता | 28 अप्रैल 2026
डिजिटल युग में जहां संचार के साधन पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो गए हैं, वहीं रिश्तों में दूरी और भावनात्मक खालीपन भी तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। “सीन लेकिन इग्नोर” आज के दौर की एक आम लेकिन गहरी समस्या बनती जा रही है, खासकर युवाओं के बीच।
सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के इस दौर में किसी तक पहुंचना मुश्किल नहीं रहा, लेकिन जवाब मिलना अब भी अनिश्चित बना हुआ है। पहले जहां लोग अपने प्रियजनों के संदेश या चिट्ठी का घंटों, दिनों और महीनों तक इंतजार करते थे, वहीं आज एक “सीन” के बाद भी जवाब न मिलना लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल विकल्पों की भरमार ने रिश्तों की गंभीरता को कम कर दिया है। लोग आसानी से नए संबंध बना लेते हैं, लेकिन उन्हें निभाने में उतनी ही लापरवाही दिखाते हैं। कई बार ऐसे लोग, जो कभी बेहद करीब होते हैं, समय के साथ भीड़ में एक सामान्य चेहरे की तरह खो जाते हैं।
युवाओं के बीच यह भावना तेजी से बढ़ रही है कि उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। “मैंने मैसेज किया था, लेकिन उसने देखा भी नहीं” जैसे वाक्य अब आम हो चुके हैं। हालांकि लोग इसे मजाक में टाल देते हैं, लेकिन इसके पीछे छुपी उदासी और असुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
समाजशास्त्रियों के अनुसार, आज के समय में विकल्पों की अधिकता ने लोगों को निर्णय लेने में उलझा दिया है। सही व्यक्ति को पहचानने और उसके साथ रिश्ते को बनाए रखने की बजाय, लोग नए विकल्पों की तलाश में रहते हैं, जिससे पुराने संबंध कमजोर हो जाते हैं।
अंत में, विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि डिजिटल दुनिया में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अगर कोई रिश्ता मायने रखता है, तो उसे समय और सम्मान देना भी उतना ही जरूरी है। क्योंकि “सीन करके इग्नोर होना” सिर्फ एक ऑनलाइन व्यवहार नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव है, जो किसी के दिल को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
