*इसमें डोनाल्ड ट्रंप से लेकर चोरों के नवाचार भी हैं तो साहित्य सेमिनारों और प्रवासी भारतीयों की समस्याओं को भी व्यंग्य के माध्यम से बताया गया है। नई लेखिकाओं और लेखकों को किस तरह कुछ लोग घुमाते हैं,उसका रोमांचक विवरण भी है।सिद्धहस्त कथाकार ,हंस,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय साहित्य,पाखी,व्यंग्य यात्रा,हरिगंधा,बिपाशा,मधुमति सहित देश विदेश की सभी अच्छी साहित्यिक पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रहे लेखक की व्यंग्य भरी रचनाएं। पुस्तक अब उपलब्ध है,तीस प्रतिशत छूट के साथ मात्र 180 रुपये में डाक खर्च सहित मंगवाया जा सकता है। दिए नंबर पर कॉल करके अपनी प्रति मंगवाए9810066431 इंडिया नेट बुक्स,दिल्ली ,नोएडा।प्रकाशक
