
प्रख्यात लेखिका सर्बाणी गांगुली द्वारा रचित बंगाली कथा-साहित्य एल्बम को महिलाओं की भावनात्मक दुनिया के संवेदनशील, बहुस्तरीय और गहराई से मानवीय चित्रण के लिए पाठकों और साहित्य समीक्षकों से व्यापक सराहना मिल रही है। काव्यात्मक भाषा और सूक्ष्म कथाशैली से सजी यह कृति स्त्रीत्व, स्मृति, संबंधों, भावनाओं और आंतरिक दृढ़ता की शांत लेकिन प्रभावशाली पड़ताल प्रस्तुत करती है।
कृति की साहित्यिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली जब पिछले वर्ष नवंबर में ऑक्सफोर्ड में रूसी संघ द्वारा एल्बम का विमोचन किया गया। यह उपलब्धि समकालीन बंगाली साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण मानी जा रही है और इससे एल्बम को आधुनिक क्षेत्रीय कथा-साहित्य की एक सशक्त और प्रभावी आवाज़ के रूप में स्थापित किया गया है।
संवेदनशील कथावाचन और बारीकी से गढ़े गए पात्रों के माध्यम से एल्बम महिलाओं के अनकहे भावों और जीवन-अनुभवों को ईमानदारी और गरिमा के साथ सामने लाती है। इसकी आत्ममंथनकारी शैली और रोज़मर्रा के भावनात्मक जटिलताओं का सजीव चित्रण पाठकों से गहरा जुड़ाव स्थापित करता है, जिससे यह हालिया बंगाली कथा-साहित्य की एक उल्लेखनीय कृति बनकर उभरी है।
अन्नपूर्णा प्रकाशनी द्वारा प्रकाशित एल्बम कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में अन्नपूर्णा प्रकाशनी के स्टॉल संख्या 372 पर उपलब्ध रही, जहाँ पुस्तक प्रेमियों को महिलाओं की आवाज़ और अनुभवों का सार्थक उत्सव मनाने वाली इस प्रभावशाली कृति से रूबरू होने का अवसर मिला।

