
नई दिल्ली 28 जुलाई 2026 भारत के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक गोवा के स्थायी वास्तुकला मॉडल को अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है. इस विरासत को केवल संग्रहालयों तक सीमित न रखकर उसे अब भविष्य के जीवंत संसाधन के रूप में उपयोग करने की गोवा की अनूठी शैली को पूरे देश के सामने प्रस्तुत किया जाएगा. इस संबंध में नई दिल्ली में आगामी 31 जुलाई को गोअन आर्किटेक्चर एंड सस्टेनेबिलिटी पर एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है. गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की परिकल्पना और पहल पर इस सम्मेलन का आयोजन गोवा स्टेट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दृष्टिकोण से प्रेरित यह सम्मेलन देश की बदलती वास्तुकला को नई दिशा देगा. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश भर के नीति निर्माताओं, वास्तुकारों योजनाकारों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक मंच पर लाना है. सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव व केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे.
गोवा के इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पर्यावरण और निर्माण को एक दूसरे का विरोधी नहीं बल्कि पूरक माना गया है. गोवा की पारंपरिक वास्तुकला जैसे सांस लेने वाली लेटराइट दीवारें मानसून का पानी आसानी से हटाने वाली ढलानदार छतें, हवादार बरामदे और आंगन जलवायु के अनुकूल और कम ऊर्जा की खपत वाले होते हैं. यह पारंपरिक वास्तुकला आधुनिक सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण होने के साथ-साथ गोवा की सांस्कृतिक पहचान को भी जीवंत रखती है.
वर्तमान समय में जब देश के तमाम शहर तेजी से शहरीकरण, बढ़ते तापमान और ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब गोवा का यह मॉडल एक सम्मेलन के जरिये बेहतरीन समाधान प्रस्तुत कर रहा है. सम्मेलन में वास्तुकला और विरासत टिकाऊ आवास ऊर्जा कुशल इमारतों और जलवायु के अनुकूल निर्माण सामग्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. इन सत्रों में देश और विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ अपने विचारों को साझा करेंगे.
मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत का मानना है कि, गोवा का यह मॉडल देश के हर हिस्से के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. इस सम्मेलन के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि देश के सबसे बेहतरीन माइंडसेट वाले दिग्गज इस मॉडल का अध्ययन करें. ताकि भारत का विकास न केवल तेजी से हो बल्कि वह अधिक हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल भी बन सके. कार्यक्रम के अंत में एक विदाई सत्र और नेटवर्किंग सत्र का आयोजन भी किया जाएगा. जिससे भविष्य की कार्ययोजना को मजबूती मिल सके.
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