
हिंदूकाल संवाददाता
समाज में पुलिस की वर्दी केवल कपड़ा नहीं होती, बल्कि वह भरोसे, सुरक्षा और कानून की पहचान होती है। लेकिन जब कोई व्यक्ति इसी पहचान का गलत इस्तेमाल करके लोगों को डराने और ठगने लगे, तब यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज के विश्वास पर हमला बन जाता है। हाल ही में सामने आए अंकित सिंह मामले ने यही सवाल खड़ा किया है।
बताया जा रहा है कि आरोपी खुद को IPS अधिकारी बताकर लोगों को धमकाता था और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे वसूलने की कोशिश करता था। नकली पहचान, फर्जी रौब और सोशल मीडिया के जरिए उसने कई लोगों को भ्रमित किया। यह घटना दिखाती है कि आज के डिजिटल दौर में ठगी केवल पैसों की नहीं, बल्कि विश्वास की भी हो रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग पुलिस और प्रशासन के नाम से जल्दी डर जाते हैं। अपराधी इसी डर का फायदा उठाते हैं। इसलिए अब केवल कानून सख्त होने से काम नहीं चलेगा, लोगों को भी जागरूक और सतर्क बनना होगा। किसी भी कॉल, मैसेज या ऑनलाइन धमकी पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है।
यह मामला प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान के खिलाफ तेजी से कार्रवाई हो। क्योंकि जब नकली चेहरे असली व्यवस्था का रूप लेने लगते हैं, तब सबसे बड़ा नुकसान आम जनता के भरोसे को होता है।
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