देश में बढ़ती सांप्रदायिक बयानबाज़ी पर चिंता, मुसलमानों को शिक्षा, एकता और संवाद की ज़रूरत: इकबाल अंसारी

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कोलकाता, 23 मई: देश में हाल के दिनों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानबाज़ी पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महासचिव एवं सामाजिक पर्यवेक्षक इकबाल अंसारी ने कहा कि भारत का मुस्लिम समाज मेहनतकश, शांतिप्रिय और रोज़गार से जुड़ा हुआ तबका है, जो किसी भी प्रकार के तनाव या अशांति का समर्थन नहीं करता।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश मुसलमान मजदूरी, छोटे कारोबार, कारीगरी और मेहनत-मजदूरी से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से कमजोर होने के कारण वे लगातार टिप्पणियों और निशाने का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार आज की राजनीति में “मुस्लिम, मस्जिद, मदरसा, मौलाना और इस्लाम” एक विशेष मुद्दा बना दिया गया है, जबकि हकीकत यह है कि देश के अधिकांश मुसलमानों को धार्मिक शिक्षा और इस्लाम की बुनियादी जानकारी भी सीमित रूप से ही प्राप्त है।
इकबाल अंसारी ने कहा कि भारतीय मुसलमान किसी युद्धकारी मानसिकता के नहीं, बल्कि शांति और भाईचारे में विश्वास रखने वाले लोग हैं। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गरीब मुसलमानों के खिलाफ कई बार मनगढ़ंत आरोप और दावे आसानी से प्रसारित कर दिए जाते हैं, लेकिन उनके पक्ष में प्रभावी आवाज़ बहुत कम सुनाई देती है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब, विविधता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सांप्रदायिक मानसिकता के खिलाफ गंभीर कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद के बढ़ने से पहले उसका समाधान निकालना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इकबाल अंसारी ने मुसलमानों को भी सलाह दी कि वे केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा, जागरूकता, संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अपने मुद्दों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जो समाज समय के साथ चलना सीख लेता है, वही सम्मान और तरक्की हासिल करता है।


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