संवाददाता हिंदूकाल चंडीगढ़

पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है। यूनिवर्सिटी के पूर्व मानव विज्ञान विभागाध्यक्ष और पूर्व डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स, प्रो. केवल कृष्ण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।
🌏 दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में 11वां स्थान
वर्ष 2025 की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा जारी प्रतिष्ठित रिपोर्ट के अनुसार, ‘लीगल एंड फोरेंसिक मेडिसिन’ श्रेणी में प्रो. कृष्ण को दुनिया भर के 15,009 फोरेंसिक वैज्ञानिकों में 11वां स्थान प्राप्त हुआ है। इस रैंकिंग के साथ वे भारत के नंबर-1 फोरेंसिक वैज्ञानिक बन गए हैं।
🔬 शोध और विशेषज्ञता के क्षेत्र
प्रो. केवल कृष्ण का शोध कार्य आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान की रीढ़ माना जाता है। उनके महत्वपूर्ण योगदानों में शामिल हैं:
- पहचान तकनीक: फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट (पैर के निशान) और ईयरप्रिंट का गहन विश्लेषण।
- आधुनिक तकनीक: फोरेंसिक साइंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सफल उपयोग।
- चेहरा पुनर्निर्माण: मानव चेहरे की पुनर्निर्माण तकनीक और हस्ताक्षर सत्यापन में विशेषज्ञता।
📊 सफलता के प्रभावशाली आंकड़े
उनकी यह रैंकिंग उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और शोध की गुणवत्ता को दर्शाती है:
- 422 शोध पत्र: अब तक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित।
- 1.5 लाख+ सिटेशन: उनके शोध को वैश्विक स्तर पर डेढ़ लाख से अधिक बार संदर्भ के रूप में उपयोग किया गया है।
- प्रतिष्ठित जर्नल: उनके शोध ‘नेचर’ और ‘द लेंसेट’ जैसे विश्व प्रसिद्ध जर्नल्स में स्थान पा चुके हैं।
प्रो. केवल कृष्ण की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह भारत के फोरेंसिक अनुसंधान को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाती है।
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