
बच्चों के बीच कृषि साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल किसान्का (Kisaanka) ने अपनी एग्री-बुक्स की उपलब्धता कोलकाता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर घोषित की है। इन पुस्तकों के भौतिक संस्करण कोलकाता में अन्नपूर्णा प्रकाशनी के स्टॉल संख्या 372 पर उपलब्ध रहे, जबकि इनके ई-बुक संस्करण अमेज़न पर उपलब्ध हैं, जिससे ये पुस्तकें देश-विदेश के पाठकों तक आसानी से पहुँच सकें।
आज के समय में बच्चों को भोजन के स्रोत और खेती की वास्तविकताओं से फिर से जोड़ने की आवश्यकता को समझते हुए, किसान्का की एग्री-बुक्स को रोचक और आयु-अनुकूल सामग्री के माध्यम से तैयार किया गया है। इन पुस्तकों में किसान, मिट्टी, पानी, फसलें और सतत कृषि पद्धतियों जैसे मूलभूत विषयों को सरल और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे बच्चे कम उम्र से ही प्रकृति के प्रति सम्मान और खाद्य प्रणाली की समझ विकसित कर सकें।
व्यक्तिगत पाठकों के अलावा, किसान्का ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल भी पेश किया है। यह पहल कक्षा शिक्षण और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से संरचित कृषि शिक्षा को संभव बनाती है। इसके अंतर्गत शिक्षकों को विशेष रूप से तैयार की गई सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जो छात्रों में जिज्ञासा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नवाचारी सोच को प्रोत्साहित करती है।
किसान्का को आईआईएम कलकत्ता और उत्तर पूर्वी परिषद (नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल), भारत सरकार द्वारा इनक्यूबेट किया गया है, जो इस पहल की मजबूत शैक्षणिक, शोध और सामाजिक प्रभाव की नींव को दर्शाता है।
भौतिक और डिजिटल दोनों माध्यमों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करते हुए, किसान्का अगली पीढ़ी के लिए कृषि शिक्षा को सुलभ, प्रासंगिक और रोचक बनाने के अपने मिशन को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

उपलब्धता:
- भौतिक पुस्तकें: अन्नपूर्णा प्रकाशनी, स्टॉल संख्या 372, कोलकाता
- ई-बुक्स: अमेज़न पर उपलब्ध
- संस्थागत सब्सक्रिप्शन: स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपलब्ध
