जेआईएस यूनिवर्सिटी के 6वें दीक्षांत समारोह में 1,450 विद्यार्थियों को डिग्री व डिप्लोमा प्रदान

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कोलकाता, 21 फरवरी 2026। JIS University ने अपने 6वें दीक्षांत समारोह को गरिमा और भव्यता के साथ आयोजित करते हुए 1,450 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

मुख्य अतिथियों में पद्म भूषण प्रो. (डॉ.) शिव कुमार सरीन, चांसलर एवं निदेशक, Institute of Liver and Biliary Sciences; भारत के प्रथम लोकपाल और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष; विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और जेआईएस ग्रुप के प्रबंध निदेशक सरदार तरनजीत सिंह; कुलपति प्रो. भास्कर गुप्ता तथा प्रो-वाइस चांसलर प्रो. गौतम घोष शामिल रहे। समारोह में गवर्निंग बोर्ड और एकेडमिक काउंसिल के सदस्य, निदेशक, डीन, शिक्षकगण और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत शैक्षणिक शोभायात्रा और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद प्रो-वाइस चांसलर के स्वागत भाषण के पश्चात कुलाधिपति सरदार तरनजीत सिंह ने औपचारिक रूप से दीक्षांत समारोह का उद्घाटन किया। कुलपति प्रो. भास्कर गुप्ता ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और प्रगति का उल्लेख किया।

इस अवसर पर कुल 1,450 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 999 स्नातक, 315 स्नातकोत्तर, 121 डिप्लोमा और 15 पीएचडी डिग्रियां शामिल हैं। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 38 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 30 को रजत पदक और 24 को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। साथ ही तीन ‘चांसलर गोल्ड मेडल’, एक ‘बेस्ट ऑल-राउंड ग्रेजुएट अवॉर्ड’ और तीन ‘स्पेशल अप्रिसिएशन अवॉर्ड’ भी प्रदान किए गए।

डिग्रियां इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, फार्मेसी, साइंस, एजुकेशन, लॉ, हॉस्पिटैलिटी एवं होटल एडमिनिस्ट्रेशन, एग्रीकल्चर तथा एडवांस्ड स्टडीज एंड रिसर्च जैसे विविध संकायों में प्रदान की गईं, जो विश्वविद्यालय की बहुआयामी शैक्षणिक क्षमता को दर्शाती हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में सरदार तरनजीत सिंह ने कहा, “यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण है। हमारे छात्र अपने परिश्रम, समर्पण और उपलब्धियों के साथ जीवन के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि वे ज्ञान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को अपनाते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देंगे।”

दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता और उत्कृष्टता की परंपरा को एक बार फिर मजबूत आधार प्रदान किया।


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