कोलकाता में गूंजेगा राजस्थान का रंग – मारुधर मेला 28 दिसंबर को

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कोलकाता:
राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति, रंग-बिरंगे परिधान, लोकनृत्य और पारंपरिक स्वादों का भव्य संगम देखने को मिलेगा 28 दिसंबर को, जब मारवाड़ी संस्कृत मंच द्वारा आयोजित मारुधर मेला कोलकाता में सजेगा। इस सांस्कृतिक महोत्सव का नेतृत्व कर रहे हैं विकास पोद्दार, जिनकी परिकल्पना में यह मेला राजस्थान की आत्मा को कोलकाता के दिल तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

मारुधर मेला में राजस्थान की कला, संस्कृति, खान-पान और लोकपरंपराओं की जीवंत झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिलेगी। यह मेला हर आयु वर्ग के दर्शकों के लिए एक यादगार और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा।

केकेहुबी (Kkhubii) की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगा Kkhubii द्वारा विशेष रूप से क्यूरेट किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम। IIM बैंगलोर और NSRCEL मुंबई द्वारा इनक्यूबेटेड इस क्रिएटिव और कल्चरल प्लेटफॉर्म का नेतृत्व कर रही हैं श्रेष्ठा गांगुली
Kkhubii अपनी समकालीन सोच के साथ भारतीय विरासत को आधुनिक अभिव्यक्ति से जोड़ने के लिए जाना जाता है। इस मंच के माध्यम से परंपरा और वर्तमान का सुंदर संगम दर्शकों को एक अनूठा अनुभव देगा।

राजस्थानी लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति

सांस्कृतिक संध्या को और भी खास बनाएंगे प्रसिद्ध नृत्यांगना अविरूप सेनगुप्ता और उनकी टीम, जो प्रामाणिक और ऊर्जावान राजस्थानी लोकनृत्य की प्रस्तुति देंगे। उनकी प्रस्तुति में राजस्थान की लोककथाएँ, लय और उत्सवधर्मिता सजीव हो उठेगी, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी।

संस्कृति, स्वाद और परंपरा का उत्सव

मारुधर मेला में:

  • प्रामाणिक राजस्थानी व्यंजन,
  • पारंपरिक हस्तशिल्प और कला,
  • लोकसंस्कृति से जुड़ी विविध प्रस्तुतियाँ
    दर्शकों को राजस्थान की मिट्टी से जोड़ेंगी।

आयोजकों के अनुसार, इस भव्य आयोजन में 5,000 से 7,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे यह मेला शहर के सबसे चर्चित सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बनने जा रहा है।

सिर्फ मेला नहीं, एक सांस्कृतिक पहचान

मारुधर मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पहचान, समुदाय और साझा विरासत का उत्सव है।
मारवाड़ी संस्कृत मंच, विकास पोद्दार की दूरदर्शी सोच और श्रेष्ठा गांगुली के नेतृत्व में Kkhubii की रचनात्मक क्यूरेशन के साथ, यह आयोजन रंग, संगीत और सामूहिक आनंद से भरपूर एक अविस्मरणीय शाम का वादा करता है—
जहाँ राजस्थान की आत्मा, कोलकाता की धड़कन से मिलेगी।


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