
कोलकाता | 11 जनवरी 2026 :
भारत के पहले आर्ट-टेक स्टार्टअप कखुबी (Kkhubii) ने कोलकाता में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के दौरान अपने नए लोगो, आधिकारिक वेबसाइट, भारतीय कठपुतली कला पर आधारित एक विशेष ई-बुक (अब अमेज़न पर उपलब्ध) और अपने आधिकारिक थीम सॉन्ग “Kkhubii Hai Vibe” का भव्य अनावरण किया। यह शाम परंपरा, तकनीक और रचनात्मक अभिव्यक्ति का जीवंत संगम बनी, जहाँ आधुनिक कथावाचन के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया गया।
फिल्ममेकर श्रेष्टा गांगुली द्वारा स्थापित और आईआईएम बैंगलोर द्वारा इनक्यूबेटेड कखुबी एक ऐसा गतिशील मंच है, जो पारंपरिक कला रूपों को आधुनिक डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ता है। नई वेबसाइट का शुभारंभ कखुबी की सोच को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कला, संस्कृति, कहानी कहने और भविष्य की साझेदारियों के लिए एक डिजिटल द्वार के रूप में कार्य करेगा।
नया लोगो कखुबी की विकसित होती पहचान को दर्शाता है—जो भारतीय सांस्कृतिक जड़ों में गहराई से रची-बसी है, साथ ही नवाचार, सहयोग और वैश्विक पहुँच को भी अपनाती है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भारतीय कठपुतली कला पर आधारित ई-बुक का विमोचन रहा। यह प्रकाशन भारत की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली कथा परंपराओं में से एक पर प्रकाश डालता है। सुसंगठित कथाओं और दृश्य दस्तावेज़ीकरण के माध्यम से यह ई-बुक पारंपरिक कठपुतली कलाओं को संरक्षित करने, दस्तावेज़ित करने और नई पीढ़ी तथा वैश्विक दर्शकों के समक्ष पुनः प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। अमेज़न पर इसकी उपलब्धता कखुबी के सांस्कृतिक स्थिरता के लक्ष्य को और सशक्त बनाती है।
संध्या को एक सशक्त कलात्मक अनुभव प्रदान किया कखुबी के आधिकारिक थीम सॉन्ग “Kkhubii Hai Vibe” की लाइव प्रस्तुति ने। संगीत के माध्यम से यह रचना कला को एक जीवंत शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है, जो समुदायों, पीढ़ियों और रचनात्मक अनुशासनों को जोड़ती है।
कखुबी की परिकल्पना पर बात करते हुए संस्थापक श्रेष्टा गांगुली ने कहा कि कखुबी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य कला को सुलभ, प्रासंगिक और कलाकारों के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है, साथ ही भारत की सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान बनाए रखना है।

इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में भारतीय अभिनेत्री मौबनी सरकार और प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर अविरूप सेनगुप्ता की उपस्थिति ने कार्यक्रम की कलात्मक गरिमा को और बढ़ाया। साथ ही युकिको युआसा, जापानी कला और संस्कृति की उत्साही, सांस्कृतिक सेतु एवं जापानी भाषा प्रशिक्षक की मौजूदगी ने कखुबी के बढ़ते वैश्विक और अंतर-सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाया।
कार्यक्रम में कला और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध को भी रेखांकित किया गया। पर्यावरणविद् एस. एम. घोष ने कहा कि कला और संस्कृति सदियों से प्रकृति के साथ मानव संबंधों का प्रतिबिंब रही हैं और आज के दौर में रचनात्मक अभिव्यक्ति पर्यावरण जागरूकता, संरक्षण और सतत विकास के लिए एक सशक्त माध्यम बन चुकी है—जो कखुबी की सोच के अनुरूप है।
उद्घाटन समारोह में कखुबी की आगामी रचनात्मक योजनाओं की भी झलक दिखाई गई। फिल्मों, सांस्कृतिक कंटेंट और भारत व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगात्मक परियोजनाओं से जुड़ी कई घोषणाएँ आने वाले समय में की जाएँगी, जिनका उद्देश्य भारतीय कला रूपों को वैश्विक मंच पर स्थापित करना और अंतर-सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करना है।
इस ऐतिहासिक लॉन्च के साथ कखुबी ने एक नए अध्याय में प्रवेश किया है—जहाँ वह भारत की कलात्मक विरासत, पर्यावरण चेतना और कला-तकनीक के भविष्य के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।
